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Dr Alok Kumar
 कभी अतिशयोक्ति न करें.

यह ध्यान देने का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है की कभी भी बढ़ा-चढ़ा कर बात न करें, जिससे की आप कुछ असत्य कह जाएं, न ही किसी को संकीर्णता विचार से अवगत कराएं. अति-नाटकीयता निर्णय लेने की फिजूलखर्ची है, जो कि किसी की समझ की या स्वाद की संकीर्णता दिखाती है. स्तुति जीवंत जिज्ञासा को पैदा करती है, यह चाहत की जनक होती है और इसके बाद यदि किसी का कीमत से कम मूल्यांकन होता है, जैसा कि अधिकांश होता है, चाहत छली से विद्रोह करती है, और खुद से और व्यक्ति से चीजों को गलत तरह से आकलन करने का बदला लेती हैं, उससे जिसने इसकी सिफ़ारिश की थी. विवेकशील व्यक्ति सावधानी से काम को करता है, और प्राथमिकता से चूक से हुई गलती को स्वीकार करता है न की दोषारोपण करता है. दुर्लभ चीज़ें असाधारण होती हैं, इसलिए साधारण मूल्यांकन को कम कर देती हैं. अति-नाटकीयता, झूठ बोलने की एक शाखा है, और आप इसके द्वारा अपना सम्मान खोते हैं.

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