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Dr Alok Kumar

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 कभी अतिशयोक्ति न करें.
यह ध्यान देने का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है की कभी भी बढ़ा-चढ़ा कर बात न करें, जिससे की आप कुछ असत्य कह जाएं, न ही किसी को संकीर्णता विचार से अवगत कराएं. अति-नाटकीयता निर्णय लेने की फिजूलखर्ची है[Read more]...

 विचार करें जब चीज़ें परिपक्व हों,
और फिर उनका आनंद लेते रहें. प्रकृति के सभी कार्य परिपक्वता के एक निश्चित बिंदु तक पहुँचते हैं; तब तक कि वे बेहतर बनें, उसके बाद उनका क्षय होने लगता है. कला के कुछ कार्य उस बिंदु तक पहुँच जाते हैं [Read more]...

 जानें अपने मजबूत बिंदुओं को;
यह आपको मिले मशहूर उपहार हैं; उन्हें विकसित करें और यह आपकी सहायता के लिए काफी हैं. हर एक में कुछ न कुछ उत्कृष्ट होता है यदि वह अपने मजबूत बिंदुओं को जान सकें. यह जानें कि किन विशेषताओं में आगे त[Read more]...

अध्याय-2: स्थिर प्रज्ञ पुरुष : श्लोक 46-50
46. जिस प्रकार एक छोटे जलाशय के द्वार जितनी जरूरत की पूर्ति हो सकती है, उतनी पूर्ति एक बड़े जलाशय द्वारा स्वतः ही हो जाती है. उसी तरह से वेदों में वर्णित विभिन्न देवताओं की पूजा से जो फल प्राप्त ह[Read more]...

 आपकी प्रतिष्ठा सहृदय की हो.
अनुग्राही होना एक महान महिमा और पराक्रम है, यह एक राजा का विशेषाधिकार है जिसे सार्वभौमिक सद्भावना चाहिए. दूसरों की तुलना में अधिक अच्छा करना-- यह लाभ की स्थिति की महान कमान है. वह मित्र बनाते ह[Read more]...

अध्याय-2: स्थिर प्रज्ञ पुरुष : श्लोक 41-45
41. हे अर्जुन! इस कर्मयोग में निश्चयात्मक (निश्चित) बुद्धि एकनिष्ठ होती है; किंतु अस्थिर विचार वाले विवेकहीन सकाम मनुष्यों की बुद्धियाँ निश्चित ही बहुत भेदों वाली (अनेक दिशा में बिखरी) और अनंत [Read more]...

 मामूली कुछ भी नहीं है, स्वाद में भी नहीं.
अनेक महान और बुद्धिमान, सुगमता से अस्वस्थ होते है जब उनके कृत्य भीड़ को संतुष्ट करते हैं! समझदार को अत्यधिक करतल ध्वनि कभी नहीं संतुष्ट करती. कुछ ऐसे भी हैं जो लोकप्रियता होने के लिए कुछ भी करन[Read more]...

अध्याय-2: स्थिर प्रज्ञ पुरुष : श्लोक 36-40
36. तुम्हारे शत्रु लोग तुम्हारे सामर्थ्य की निंदा करते हुए अनेक न कहने योग्य बातों को भी कहेंगे; उससे अधिक दुःख का विषय और क्या हो सकता है? 37. हे कुंती नंदन! या तो तुम युद्ध में मारे जाने पर स्वर्ग [Read more]...

अध्याय-2: स्थिर प्रज्ञ पुरुष : श्लोक 31- 35
31. इसके अतिरिक्त अपने धर्म को देखकर भी तुम्हारा विचलित होना उचित नहीं है, क्योंकि धर्म के लिए युद्ध करने की अपेक्षा क्षत्रिय के लिए इससे बढ़कर कोई दूसरा कल्याणकारी कर्तव्य नहीं है. 32. हे पार्थ![Read more]...

 कल्पना को नियंत्रण में रखें ;
कभी सुधारते हुए, कभी नियंत्रित करते हुए. यह सभी हमारी ख़ुशी के लिए महत्वपूर्ण है, और फिर भी कारणों को सही रखें. यह निरंकुश हो सकती है, और यह निगरानी करते रहने का विषय है, यह जीवन पर नियंत्रण करने ल[Read more]...

 मनुष्य का व्यवहारिक ज्ञान;
ज्ञानी व्यक्ति अपने को रुचि पूर्ण और सुरुचि पूर्ण व्यापक ज्ञान से तैयार करता है; एक व्यवहारिक ज्ञान की, क्या आम तौर पर चल रहा है उसकी अपेक्षा की वह एक विशेषज्ञ की तरह हो. वे प्रचुर भंडार बुद्धि[Read more]...

अध्याय-2: स्थिर प्रज्ञ पुरुष : श्लोक 26-30
26. हे महाबाहो! यदि तुम इस जीवात्मा को सदा जन्म लेने वाला तथा सदा मरने वाला मानते हो, तब भी तुम्हारा इस प्रकार से शोक करने का कोई कारण नहीं है. 27. क्योंकि इस मान्यता के अनुसार जन्म लेने वाले की मृत्[Read more]...

अध्याय-2: स्थिर प्रज्ञ पुरुष : श्लोक 21-25
21. हे पार्थ! जो पुरुष इस जीवात्मा को नित्य, अजन्मा, अपरिवर्तनशील और अविनाशी जानते हैं, वह पुरुष कैसे किसी की हत्या करवा सकते हैं या हत्या कर सकते हैं? 22. जिस तरह से मनुष्य पुराने वस्त्रों को त्याग[Read more]...

 समयानुकूल व्यक्ति.
नायब व्यक्ति अपने को समय पर निर्भर करते हैं. हर कोई ऐसा नहीं है जो कि उस समय को पाए जिसका वह हकदार है, और जब भी वह उसे पाता है वह हमेशा नहीं जानता की वह उसका उपयोग कैसे करे. कुछ पुरुष उचित समय को जा[Read more]...

 प्रयोग और क्षमता;
कोई भी उत्कर्ष को इन दोनों के बिना प्राप्त नहीं कर सकता, और जहाँ यह एकजुट हैं वहाँ सब उत्कर्ष है. औसत प्रयोग से ज्यादा पा जाता है उस श्रेष्ठ से जो कि प्रयोग नहीं करता. काम वह कीमत है जिसका प्रतिष[Read more]...

अध्याय-2: स्थिर प्रज्ञ पुरुष : श्लोक16-20
16. अनित्य वस्तु (सर्दी-गर्मी आदि) तो स्थाई नहीं हैं और नित्य वस्तु (जीवात्मा) का विनाश नहीं होता है. इस प्रकार इन दोनों का ही सार तत्व ज्ञानी पुरुषों द्वारा देखा गया है. 17. किंतु जो इस सारे शरीर में[Read more]...

अध्याय-2: स्थिर प्रज्ञ पुरुष : श्लोक10-15
10. हे भरतवंशी धृतराष्ट्र! अंतर्यामी श्री कृष्ण ने दोनों सेनाओं के बीच में शोक करते हुए उस अर्जुन से हँसते हुए से यह वचन बोले- 11. हे अर्जुन! तुम न शोक करने योग्य मनुष्यों के लिए शोक कर रहे हो और पंड[Read more]...

 अपने कार्यों के करने के तरीक़ों बदलते रहें;
हमेशा एक ही तरह से कार्य न करें, जिससे की दूसरों का ध्यान आपकी ओर आकर्षित रहे, ख़ासकर जब वहाँ कोई विरोधी हो. कभी भी पहले जैसे आवेग से नहीं; वे जल्दी ही एकरूपता को पहचान जाएंगे, और पूर्वानुमान से आ[Read more]...

अध्याय-2: स्थिर प्रज्ञ पुरुष : श्लोक 6-9
6. हम यह भी नहीं जानते कि हमारे लिए युद्ध करना और न करना, इन दोनों में से कौन-सा श्रेष्ठ है, अथवा यह भी नहीं जानते कि उन्हें हम जीतेंगे या हम को वे जीतेंगे. और जिनको मारकर हम जीना भी नहीं चाहते, वे ही [Read more]...

 परामर्श के भाव बनाए रखें.
यह शक्तिशाली का विशेषाधिकार है की वह अपने साथ प्रज्ञावान लोगों को जोड़ें रखे; वह उसे हर तरह के अज्ञान से छुटकारा दिलाते हैं, वह प्रत्येक समस्या के विवादास्पद बिंदु का समाधान देते हैं. यह अपने [Read more]...

 प्रकृति और कला:
सामग्री और कारीगरी. कोई भी सौंदर्य अलंकृत नहीं है और कोई भी उत्कृष्टता बर्बर नहीं है यदि वह चालाकी से समर्थित नहीं है: यह बुराई का उपचार करती है और अच्छाई को सुधारती है. प्रकृति मुश्किल से इसस[Read more]...

अध्याय-2: स्थिर प्रज्ञ पुरुष : श्लोक 1-5
1-2. संजय बोले- उस प्रकार करुणा से व्याप्त और आँसुओं से भरी हुई और व्याकुल आँखों वाले वेदना से भरे हुए अर्जुन से मधुसूदन ने यह कहा - हे अर्जुन! तुम्हें इस असमय (गलत समय) में यह मोह क्यों हो रहा है? क्[Read more]...

अध्याय-1: श्लोक 40-46
40. हे कृष्ण! पाप के अधिक बढ़ जाने से कुल की स्त्रियाँ भी भ्रष्ट हो जाती हैं. हे वृष्णिवंशी! स्त्रियों के भ्रष्ट होने से वर्णसंकर पैदा होते हैं. 41. वर्णसंकर कुल के नाश करने वालों को और कुल को नरक मे[Read more]...

 सौभाग्य और प्रतिष्ठा.
जहां एक चंचल है वहाँ दूसरा टिकाऊ है. एक इस जीवन के लिए, दूसरा जीवन के बाद के लिए; एक ईर्ष्या के खिलाफ, दूसरा गुमनामी के खिलाफ है. सौभाग्य वांछित है, यह कई बार सहायता करता है और ख्याति अर्जित कराता [Read more]...

अध्याय-1: श्लोक 35-39
35. हे जनार्दन! तीनों लोकों के राज्य की प्राप्ति के लिए भी मैं इन्हें मारना नहीं चाहता हूँ: फिर पृथ्वी के राज्य लिए तो कहना ही क्या है? धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारकर हमें क्या सुख प्राप्त हो सकत[Read more]...

 बिना भावावेश के रहें.
यह बुद्धि की श्रेष्ठता का उत्कृष्ट प्राधिकार है. उनका उत्कर्ष उनके अनित्य और धीमे आवेग से अप्रभावित रखता है, अपने खुद के आवेग पर क़ाबू पाने से बड़ा कोई शासन खुद पर नहीं किया जा सकता: यह स्वतंत्[Read more]...

अध्याय-1: श्लोक 27- 34
27-28. उन उपस्थित समस्त बंधुओं को देखकर कुंती के पुत्र अर्जुन ने अत्यधिक करुणा से युक्त होकर शोक करते हुए यह वचन बोले- “हे मेरे प्रिय श्री कृष्ण! युद्ध की इच्छा से इकट्ठे हुए अपने इन स्वजनों को देख[Read more]...

 एक मनुष्य अपने उच्चतम शिखर पर.
हम जन्म से सिद्ध नहीं होते हैं: हर दिन हम अपने व्यक्तित्व का विकास करते हैं. हमारा यह कार्यक्रम चलता रहता है जब तक हम अपने पूरे अस्तित्व की उपलब्धि के साथ श्रेष्ठता के उच्चतम शिखर पर न पहुँचें. [Read more]...

 निर्भरता का बोध बनाए रखें;
वह नहीं जो सँवरता रहता है बल्कि वह जो आराधना करता है वह देवत्व को प्राप्त होता है. बुद्धिमान व्यक्ति यह ज्यादा देखना पसंद करता है लोग उसकी आवश्यकता को महसूस करे इसकी अपेक्षा की वह उसका अभिनंद[Read more]...

अध्याय-1: श्लोक 22-26
22-23. और जब तक कि मैं युद्ध क्षेत्र में खड़े हुए युद्ध के अभिलाषी इन सभी वीर योद्धाओं को भली प्रकार देख न लूँ कि इस युद्ध में मुझे किन-किन के साथ युद्ध करना होगा तथा दुर्बुद्धि धृतराष्ट्र के पुत्र[Read more]...

अध्याय-1: श्लोक 16-21
16. कुंती पुत्र राजा युधिष्ठिर ने अनंतविजय और नकुल और सहदेव ने सुघोष और मणिपुष्पक नामक शंख बजाए. 17-18. हे धृतराष्ट्र! श्रेष्ठ धनुषधारी काशीराज और महारथी शिखंडी तथा धृष्टधुम्न तथा राजा विराट, अजे[Read more]...

 निर्णय लेने से पहले मामलों को कुछ समय के लिए
सराहना आपकी उपलब्धियों का मूल्य असीमित कर देती है. आपकी योजनाओं का खुलासा निरर्थक और स्वादहीन दोनों ही है. यदि आप अपनी स्थिति को तुरंत स्पष्ट नहीं करते, आप अत्यधिक उम्मीद जगा देते हैं. विशेषक[Read more]...

 अभिनय करने या अड़ने पर, अपनी किस्मत को भी वज़
ज्यादा उस पर निर्भर करता है जितना की अपने स्वभाव को दोष देने में. वह मूर्ख है जो चालीस का होने पर पहलवान बनाना चाहता है. यह बड़ा कौशल का विषय है की कैसे अपने भाग्य का मार्गदर्शन करें उसका अपने लि[Read more]...

अध्याय-1: श्लोक 11-15
11. इसलिए सब मोर्चों पर अपनी-अपनी जगह स्थित रहते हुए आप सभी निःसंदेह भीष्म पितामह की ही सब प्रकार से रक्षा करें. 12. इसके बाद कौरवों में सबसे बड़े प्रतापी पितामह भीष्म ने दुर्योधन के हृदय में हर्ष[Read more]...

अध्याय-1: श्लोक 7-10
7. हे ब्राह्मणों में श्रेष्ठ! अपने पक्ष में भी जो सेनानायक हैं, उनके बारे में भी मैं उल्लेख कर रहा हूँ. आपकी जानकारी के लिए अपनी सेना के जो-जो सेनापति हैं, उनके नाम मैं बताता हूँ. 8. स्वयं आप, द्रोणा[Read more]...

 कोई भी व्यवहार खराब ख्याति की ख़ातिर न करें;
चाहे वह थोड़े समय के लिए ही क्यों न हो जो ख्याति की जगह अधिक से अधिक बदनामी लाए. यहाँ अनेक मौजी लोग हैं और सभी विवेकशील व्यक्तियों उनके पास से पलायन कर जाना चाहिए. यहाँ हमेशा लेने के लिए विचित्र[Read more]...

 प्रत्येक मनुष्य की कमजोरी पता करें.
यह हर किसी से काम लेने की कला है. यह ज्यादा कौशल और संकल्प की जगह चाहती है. आपको जानना चाहिए की किसी को भी कैसे सहमत करें. प्रत्येक इच्छा शक्ति का विशेष प्रयोजन होता है जो कि स्वाद के अनुसार बदलत[Read more]...

अध्याय-1: श्लोक 1-6
1. धृतराष्ट्र बोले- हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में एकत्र हुए, मेरे और पांडु के पुत्रों ने युद्ध की इच्छा से एकत्र होने के बाद क्या किया. 2. संजय बोले- उस समय राजा दुर्योधन ने व्यूह रचना में खड़[Read more]...

श्रीमद भगवत गीत का हिंदी अनुवाद
श्रीमद भगवत गीता हिन्दुओं के पवित्रतम ग्रन्थों में से एक है. महाभारत के युद्ध में श्रीमद भगवत गीता श्री कृष्ण और अर्जुन के बीच कुरुक्षेत्र के युद्ध के मैदान में युद्ध के प्रारंभ होने से पूर्[Read more]...

 सभी कुछ अपने शिखर पर होता है...
इस दुनिया में किसी एक के लिए रास्ता तैयार करने की जरूरत है. आजकल ज्यादा बेहतर है तैयार करें एक विद्वान व्यक्ति (ध्रुव तार) इसकी तुलना में की बनाए सात औसत (सप्त ऋषि). ज्यादा बेहतर है की एक समाधान ख[Read more]...

बल्सार गार्सियन की दी आर्ट ऑफ़ वर्डली विजडम का
संसार को समझाने का जितना अच्छा या कहें व्यवहारिक प्रयास बल्सार गार्सियन ने किया है उतना शायद ही किसी ने किया है. बल्सार गार्सियन ने जिस कठोरता से मानवीय व्यवहार का अध्ययन किया और देखा कैसे जो[Read more]...

छद्म युद्ध...
... उसके बाद युक्ति पूर्ण छद्म युद्ध आता है, जिससे कुछ भी सुलभ है। छद्म युद्ध, चालाकी को निश्चिंतता में और दुर्भाग्य को लाभ में बदलने में युक्त हो। अतः चुनना लम्बा और घुमावदार रास्ता, इसके बाद श[Read more]...

कब लड़ना है और कब नहीं ?
एक अच्छा लड़ाकू अपने को पहले पराजय की संभावना से दूर करता है, और फिर उस अवसर का इंतजार करता है जब वह शत्रु को पराजित सके। अपने को पराजय से सुरक्षित करना हमारे खुद के हाथ में है, परंतु शत्रु अपने [Read more]...

उद्देश्य- ताकत को कैसे हासिल करें
धरती पर मनुष्य का जीवन एक युद्ध है.... —जाब 7:1 जो आगे है वह उनके लिए है जो दुनिया को जैसी कि वह है से उसमें बदलना चाहते हैं जिसमें वह विश्वास करते हैं की उसे होना चाहिए. पुस्तक “दी प्रिंस” को मैकिय[Read more]...

3. संकट क्या है?
चीनी शब्द “संकट” को दो अक्षरों से मिलकर लिखते हैं. एक का अर्थ होता है “खतरा” और दूसरे का अर्थ होता है “अवसर.” दोनों को मिलाकर वह उसे “संकट” कहते हैं. खतरा खतरा भविष्य को लेकर डर है. हम अज्ञात का [Read more]...

पुस्तक-1 / अध्याय-13
चूकि खुशी उत्तम सदगुण के अनुसार आत्मा की गतिविधि है, हम सदगुण की प्रकृति पर विचार करें; जिससे हम निश्चित ही खुशी की प्रकृति को अच्छी तरह से देख सकें. राजनीति का सच्चा छात्र, सभी चीजों के ऊपर सदग[Read more]...

2. बचपन, लड़कपन और जवानी, 1627-1656. 3. शिवाजी की शिक्षा.
शिवाजी की शिक्षा को लेकर सभासद शांत हैं. तारीख-ए-शिवाजी बताती है की दादा जी ने शिवाजी को प्रशिक्षित किया और उनके लिए श्रेष्ठ शिक्षकों की नियुक्ति की. थोड़े ही समय में शिवा लड़ने, घुड़सवारी और [Read more]...

2. बचपन, लड़कपन और जवानी, 1627-1656. / 2. पूना जागीर की स्
जब अक्तूबर 1636 के अंत में, शाहजी को मुगलों के साथ समझौता करना पड़ा, तो उन्हें शिवनेरी, त्र्यंबक और चार अन्य किले उन्हें देने पड़े. वह बालाघाट, पूना और सुपा की पैतृक जागीर को ही बचा सके जो कि पहले नि[Read more]...

अध्याय-3 शिक्षा में कलाएं
ऐसे, तब, मैंने कहा, हमारे ब्रह्मविद्या के सिद्धांत होने चाहिए-- कुछ क़िस्से सुनाने चाहिए, और अन्य को अपने अनुयायियों को नहीं बताना चाहिए जोकि युवा होने जा रहे हैं, यदि हम चाहते हैं कि वे हमारे दे[Read more]...

पुस्तक-1/ अध्याय-12
इन सवालों का निश्चित ही जवाब देना चाहिए, विचार करें की क्या खुशी उन चीजों में है जिनकी स्तुति की जाती है या उन चीजों में जिनको पुरस्कृत किया जाता है; स्पष्ट रूप से इसे संभावनाओं के बीच नहीं रखा [Read more]...

अध्याय -2 व्यक्ति, राज्य और शिक्षा
इन शब्दों के साथ मैं सोच रहा था कि मैंने चर्चा का अंत कर दिया; परंतु सत्य यह था कि यह तो वास्तव में चर्चा की शुरुआत थी. ग्लकोन् के लिए जो कि झगड़ालू क़िस्म के व्यक्ति हैं, थ्रस्य्मचुस् कि सेवा-नि[Read more]...

2. आज विद्रोही कहां हैं?
संगठित श्रमिकों की बीच अमेरिका विद्रोही बेचैनी से जागे रहते हैं— क्या वे सोते हैं. वहां वह तब निरंतर श्रमिक और भविष्य के सपने देखते हैं. यह विश्वास की श्रमिक और प्रगति एक ही चीज है और उसे अलग न[Read more]...

2. बचपन, लड़कपन और जवानी, 1627-1656. 1. शिवाजी का जन्म और
शाहजी भोसला, मराठा परिवार से भाड़े के सैनिक थे, जिन्होंने दौलताबाद से पलायन किया था और अहमदनगर के निजाम शाही सुलतान को अपनी सेवा दी. उनके कुछ स्वजनों ने मुगलों के आधीन काम किया और उन्होंने शाह[Read more]...

पुस्तक-1/ अध्याय-11
किसी आदमी की खुशी पर उसके वंशजों और उसके सभी मित्रों की किस्मत का कोई असर नहीं पड़ना चाहिए, ऐसा लगता है कि यह बहुत ही अनुचित सिद्धांत है, और इस तरह की राय का विरोध किया जाना चाहिए; लेकिन घटनाएं ज[Read more]...

1. विद्रोही क्या है?
अमेरिका के लोग बेक बे बोस्टन से केंसास शहर के निचले हिस्से तक सभी जगह रहते हैं. हाई हाइलैंड पार्क इलेनॉइस, से हार्लेम, न्यू यॉर्क की झुग्गीयों तक. कनेक्टिकट के सभ्य किसान से अरकेंसास के शेयर-क्[Read more]...

वह पांच कारण जिनके होने पर ही युद्ध करने के लि
युद्ध की कला राज्य के लिए महत्वपूर्ण है। यह जीवन और मृत्यु का प्रश्न है? मार्ग है या तो सुरक्षा का या नष्ट होने का। अतः यह विषय है उस जानकारी का जिसे किसी भी स्थिति में उपेक्षित नहीं किया जाना [Read more]...

अध्याय -1 संपत्ति, न्याय, संयम, और इसका विपरीत
...कल मैं ऐरिस्टोन के पुत्र ग्लकोन् के साथ पाईरस् गया था, जिससे वहां की देवी को हम अपनी प्रार्थना अर्पित कर सकें; और इसलिए भी क्योंकि मैं देखना चाहता था कि वे किस प्रकार से अपने उत्सव को मनाते है[Read more]...

प्रस्तावना
क्रांतिकारी ताकतों के इस समय दो लक्ष्य हैं, नैतिक साथ ही भौतिक. यह युवा नायक एक पल को आदर्शवादी पूर्व के ईसाई होने की यादों को ताजा करते हैं, साथ ही वह हिंसा के लिए तर्क करते हैं और चिल्लाते हैं, [Read more]...

1. भूमि और प्रजा . 8. मराठा चरित्र के दोष.
अब हम #मराठा चरित्र के दोषों की ओर देखते हैं. जब कोई सरकार आपूर्ति के नियमित स्रोत के रूप में लूट पर रहती है, तो उसके अधिकारी स्वाभाविक रूप से खुद के लिए रिश्वत लेने में कोई अनैतिकता नहीं देखते ह[Read more]...

पुस्तक-1 / अध्याय-9
इसी कारण से यह प्रश्न भी पूछा जाता है कि क्या खुशी को सीख कर या अभ्यास द्वारा या किसी अन्य तरह के प्रशिक्षण द्वारा अर्जित किया जा सकता है. या यह कुछ दैवीय आशीर्वाद या फिर संयोग से प्राप्त होती ह[Read more]...

1. भूमि और प्रजा . 7. आज के मराठा सैनिक और किसान.
#शिवाजी की सेना की रीढ़ की हड्डी वह खेती करने वाले लोग थे, जो कि दो निम्न जातियों #मराठा और #कुंनबी से होते थे. मराठा जाति, --- यह नाम सभी मराठी बोलने वालों पर आमतौर पर लागू नहीं होता है— 50 लाख संख्या [Read more]...

1. भूमि और प्रजा . 6. साहित्य और भाषा.
#साहित्य ने #महाराष्ट्र को संगठित होने में योगदान दिया. इसके विषय प्राचीन धर्मग्रंथों और महाकाव्यों (#महाभारत और #रामायण) से लिए गए थे जो सभी हिंदूओं की धरोहर हैं. #तुकाराम और #रामदास, #वामन #पंडि[Read more]...

पुस्तक-1 / अध्याय-8
हमें इस पर विचार करना चाहिए, हालांकि, न केवल अपने निष्कर्ष और आधार के प्रकाश में, बल्कि उसके बारे में भी जिसे आमतौर पर कहा जाता है; एक सच्चे दृष्टिकोण के साथ सभी तथ्य सामंजस्य बनाते हैं, लेकिन एक[Read more]...

पुस्तक-1 / अध्याय-7
हमें इस पर विचार करना चाहिए, हालांकि, न केवल अपने निष्कर्ष और आधार के प्रकाश में, बल्कि उसके बारे में भी जिसे आमतौर पर कहा जाता है; एक सच्चे दृष्टिकोण के साथ सभी तथ्य सामंजस्य बनाते हैं, लेकिन एक[Read more]...

1. भूमि और प्रजा . 5. धार्मिक शिक्षक.
समानता की इसी तरह की भावना को धर्म ने भी बढ़ावा दिया था. इसमें कोई संदेह नहीं कि #ब्राह्मणों ने अपनी पवित्र विद्या पर एकाधिकार को बनाए रखने और अन्य जातियों से अपने को आध्यात्मिक अभिजात वर्ग के [Read more]...

1. भूमि और प्रजा . 4. मराठा चरित्र.
लेकिन ऐसे भू-भाग और मौसम के अपने पुरस्कार देने वाले फायदे भी हैं. वे आत्मनिर्भरता, साहस, दृढ़ता, एक कठिन सादगी, एक सरलता, सामाजिक समानता की भावना और इसके फलस्वरूप मनुष्य की गरिमा पर गर्व करते है[Read more]...

पुस्तक-1 / अध्याय-7
अब हम फिर से उस अच्छाई के लिए आते हैं, जिसको हम पाना चाहते हैं, और पूछते हैं की क्या वह हो सकती है. यह भिन्न कृत्यों में और कला में भिन्न दिखती है; यह चिकित्सा, रणनीति, और अन्य कला में भिन्न दिखती है[Read more]...

1. भूमि और प्रजा . 3. गरीबी, सादगी और समाज की समानता.
ऐसे देश में कोई भी आदमी आश्रयहीन जीवन जीने का जोखिम नहीं उठा सकता. प्राचीन महाराष्ट्र में परजीवी वर्ग नहीं था. यहां तक कि गाँव के मुखिया, जो न तो बोते थे और न ही काटते थे, को राजस्व संग्रहकर्ता, स[Read more]...

पुस्तक-1 / अध्याय-6
बेहतर हो हम सार्वभौमिक अच्छाई पर विचार करें और चर्चा करें की इससे क्या मतलब है, हालांकि इस तरह की जांच को मुश्किल बना दिया जाता है इस तथ्य से की प्रपत्र को हमारे खुद के मित्रों के द्वारा प्रस्त[Read more]...

1. भूमि और प्रजा . 2. लोगों का अलगाव
भूभाग की टूटी चट्टानी प्रकृति और इसमें जंगलों की बहुतायत, इसकी जनसंख्या को नीचे रखती है, जो यात्रा करना मुश्किल और गैर फायदे का सौदा बनाती है. यहां व्यापारियों को आकर्षित करने के लिए कोई समृद[Read more]...

पुस्तक-1 / अध्याय-5
हालांकि, हम अपनी चर्चा को उस बिंदु से फिर से शुरू करते हैं, जिसपर हम पीछे हटे थे. उस जीवन का विश्लेषण करना जिसे आदमी जीता है, अधिकांश आदमी, और सबसे ज्यादा अभद्र प्रकार के, (बिना किसी आधार के) उन चीज[Read more]...

1. भूमि और प्रजा . 1. सीमाएं, वर्षा, भूमि और फसलें.
आज लगभग ग्यारह लाख लोग, जो कि बंबई प्रेसीडेंसी (इसके अप्राकृतिक पड़ोसी, सिंध को छोड़कर) की लगभग आधी आबादी है, मराठी बोलते हैं, और अन्य नौ लाख जो मध्य प्रांत, निज़ाम के प्रभुत्व और अन्य हिस्सों मे[Read more]...

प्रस्तावना : शिवाजी की एक प्रमाणिक जीवनी
प्रथम संस्करण (अप्रैल, 1919) शिवाजी के जीवन और चरित्र को लेकर नए और महत्वपूर्ण अध्ययन की बहुत समय से जरूरत थी, क्योंकि इस विषय पर अंतिम शोध कार्य कैप्टन जेम्स ग्रांट की ग्रांट डफ की मराठों का इतिह[Read more]...

पुस्तक-1 / अध्याय-3
हमारी चर्चा पर्याप्त होगी यदि इसमें विषय-वस्तु स्पष्ट होगी, जबकि उतनी ज्यादा सटीकता की सभी चर्चा में मांग नहीं की गई है, जितनी की शिल्प के सभी उत्पादों की तुलना में की जाती है. अब उचित और ठीक का[Read more]...

पुस्तक-1/ अध्याय-2
यदि, तब, हमारे द्वारा की जाने वाली चीजों का कुछ अंत है, जिसे हम स्वयं के लिए चाहते हैं (बाकी सभी कुछ इसके लिए वांछित है), और यदि हम किसी और चीज के लिए सभी कुछ नहीं चुनते हैं (उसके लिए प्रक्रिया अनंत [Read more]...

पुस्तक-1 / अध्याय-1
हर कला और हर परीक्षण, और उसी तरह से हर कृत्य और गतिविधि, किसी अच्छी चीज को लक्ष्य बनाती है; और इस कारण से अच्छे को सही तौर पर वह घोषित किया जाता है जिसको सभी चीजें लक्ष्य बनाती है. लेकिन छोरों के ब[Read more]...

पूर्वी पाकिस्तान में अल्पसंख्यक महिलाओं के स
सिलहट जिले के हबीबगढ़ में निर्दोष हिंदूओं, विशेषतः अनुसूचित जाति के लोगों पर पुलिस और सेना द्वारा किए गए अत्याचार का वर्णन यहां किया गया है. निर्दोष आदमियों और औरतों को बेरहमी से प्रताड़ित क[Read more]...

जोगेन्द्र नाथ मंडल कौन थे?
जोगेन्द्र नाथ मंडल पाकिस्तान के प्रमुख संस्थापकों में से एक थे. वह पाकिस्तान के पहले प्रधान मंत्री लियाकत अली खान के मंत्री मंडल में शामिल एक मात्र हिंदू थे, जो पाकिस्तान के पहले कानून मंत्र[Read more]...

प्लेटों की दी रिपब्लिक का हिंदी अनुवाद
मानव स्वभाव को तार्किक आधार पर जानने के लिए निश्चित ही प्लेटों की महान रचना दी रिपब्लिक एक मनन करने योग्य पुस्तक है. कुछ प्रश्न जो कि हम अपने से हमेशा पूछते रहते हैं उसका जवाब निश्चित ही केवल प[Read more]...

शाऊल डी एलंनस्काई की विद्रोहियों के लिए नियम:
विद्रोहियों के लिए नियम: यथार्थवादी विद्रोहियों के लिए व्यावहारिक प्राथमिकता, 1971 में समुदायिक कार्यकर्ता और लेखक शाऊल डी एलंनस्काई की लिखी किताब है, जो बताती है की कैसे बदलाव के लिए सफलतापू[Read more]...

क्या आप विद्रोही हैं नेता या संगठनकर्ता बनना
समुदायिक संगठनकर्ता शाऊल डी एलंनस्काई ने पीढ़ियों से सामाजिक कार्यकर्ता और राजनेताओं को सामाजिक परिवर्तन व मध्य वर्ग को प्रेरित करने के लिए अपनी किताब Reveille for Radicals (विद्रोहियों के लिए आवाहन) स[Read more]...

यदि शिवाजी को जानना चाहते हैं तो पढ़ें जादुना
शिवाजी और उनका जीवन महाराष्ट्र के सबसे महान नायकों में से एक के जीवन और समय का एक विस्तरित विवरण है. यहां सबसे पहले महाराष्ट्र के भूगोल का संक्षिप्त परिचय और उस भूमि के लोगों के संक्षिप्त विव[Read more]...

सन तुज की दी आर्ट आँफ वार को पढ़नी चाहिए अर्था
सन तुज की दी आर्ट आँफ वार (युद्ध की कला (चीनी भाषा में; 孫子兵法, अंग्रेजी में; The Art of War, एक सैन्य प्रबंध है जिसका उपयोग वर्तमान में भी व्यापार और प्रबंधन, और युद्ध की युक्तियों के रुप में होता है। सन तुज [Read more]...

लडाई की तैयारी अर्थात आधार शिला रखना
युद्ध की कला राज्य के लिए महत्वपूर्ण है। यह जीवन और मृत्यु का प्रश्न है? मार्ग है या तो सुरक्षा का या नष्ट होने का। अतः यह विषय है उस जानकारी का जिसे किसी भी स्थिति में उपेक्षित नहीं किया जाना च[Read more]...

हमला कैसे करें अर्थात आग से आक्रमण
यहाँ पाँच तरीके हैं आग से आक्रमण करने के। पहला शत्रु सैनिकों को पड़ाव में ही मारना; दूसरा भंडारों को जला देना; तीसरा सामान ढोने के साधनों को जला देना; चौथा अस्त्रागार और हथियारों को नष्ट कर देन[Read more]...