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Dr Alok Kumar

ब्लॉग



 कभी अतिशयोक्ति न करें.
यह ध्यान देने का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है की कभी भी बढ़ा-चढ़ा कर बात न करें, जिससे की आप कुछ असत्य कह जाएं, न ही किसी को संकीर्णता विचार से अवगत कराएं. अति-नाटकीयता निर्णय लेने की फिजूलखर्ची है[Read more]...

 विचार करें जब चीज़ें परिपक्व हों,
और फिर उनका आनंद लेते रहें. प्रकृति के सभी कार्य परिपक्वता के एक निश्चित बिंदु तक पहुँचते हैं; तब तक कि वे बेहतर बनें, उसके बाद उनका क्षय होने लगता है. कला के कुछ कार्य उस बिंदु तक पहुँच जाते हैं [Read more]...

 जानें अपने मजबूत बिंदुओं को;
यह आपको मिले मशहूर उपहार हैं; उन्हें विकसित करें और यह आपकी सहायता के लिए काफी हैं. हर एक में कुछ न कुछ उत्कृष्ट होता है यदि वह अपने मजबूत बिंदुओं को जान सकें. यह जानें कि किन विशेषताओं में आगे त[Read more]...

 आपकी प्रतिष्ठा सहृदय की हो.
अनुग्राही होना एक महान महिमा और पराक्रम है, यह एक राजा का विशेषाधिकार है जिसे सार्वभौमिक सद्भावना चाहिए. दूसरों की तुलना में अधिक अच्छा करना-- यह लाभ की स्थिति की महान कमान है. वह मित्र बनाते ह[Read more]...

 मामूली कुछ भी नहीं है, स्वाद में भी नहीं.
अनेक महान और बुद्धिमान, सुगमता से अस्वस्थ होते है जब उनके कृत्य भीड़ को संतुष्ट करते हैं! समझदार को अत्यधिक करतल ध्वनि कभी नहीं संतुष्ट करती. कुछ ऐसे भी हैं जो लोकप्रियता होने के लिए कुछ भी करन[Read more]...

 कल्पना को नियंत्रण में रखें ;
कभी सुधारते हुए, कभी नियंत्रित करते हुए. यह सभी हमारी ख़ुशी के लिए महत्वपूर्ण है, और फिर भी कारणों को सही रखें. यह निरंकुश हो सकती है, और यह निगरानी करते रहने का विषय है, यह जीवन पर नियंत्रण करने ल[Read more]...

 मनुष्य का व्यवहारिक ज्ञान;
ज्ञानी व्यक्ति अपने को रुचि पूर्ण और सुरुचि पूर्ण व्यापक ज्ञान से तैयार करता है; एक व्यवहारिक ज्ञान की, क्या आम तौर पर चल रहा है उसकी अपेक्षा की वह एक विशेषज्ञ की तरह हो. वे प्रचुर भंडार बुद्धि[Read more]...

 समयानुकूल व्यक्ति.
नायब व्यक्ति अपने को समय पर निर्भर करते हैं. हर कोई ऐसा नहीं है जो कि उस समय को पाए जिसका वह हकदार है, और जब भी वह उसे पाता है वह हमेशा नहीं जानता की वह उसका उपयोग कैसे करे. कुछ पुरुष उचित समय को जा[Read more]...

 प्रयोग और क्षमता;
कोई भी उत्कर्ष को इन दोनों के बिना प्राप्त नहीं कर सकता, और जहाँ यह एकजुट हैं वहाँ सब उत्कर्ष है. औसत प्रयोग से ज्यादा पा जाता है उस श्रेष्ठ से जो कि प्रयोग नहीं करता. काम वह कीमत है जिसका प्रतिष[Read more]...

 अपने कार्यों के करने के तरीक़ों बदलते रहें;
हमेशा एक ही तरह से कार्य न करें, जिससे की दूसरों का ध्यान आपकी ओर आकर्षित रहे, ख़ासकर जब वहाँ कोई विरोधी हो. कभी भी पहले जैसे आवेग से नहीं; वे जल्दी ही एकरूपता को पहचान जाएंगे, और पूर्वानुमान से आ[Read more]...

 परामर्श के भाव बनाए रखें.
यह शक्तिशाली का विशेषाधिकार है की वह अपने साथ प्रज्ञावान लोगों को जोड़ें रखे; वह उसे हर तरह के अज्ञान से छुटकारा दिलाते हैं, वह प्रत्येक समस्या के विवादास्पद बिंदु का समाधान देते हैं. यह अपने [Read more]...

 प्रकृति और कला:
सामग्री और कारीगरी. कोई भी सौंदर्य अलंकृत नहीं है और कोई भी उत्कृष्टता बर्बर नहीं है यदि वह चालाकी से समर्थित नहीं है: यह बुराई का उपचार करती है और अच्छाई को सुधारती है. प्रकृति मुश्किल से इसस[Read more]...

 सौभाग्य और प्रतिष्ठा.
जहां एक चंचल है वहाँ दूसरा टिकाऊ है. एक इस जीवन के लिए, दूसरा जीवन के बाद के लिए; एक ईर्ष्या के खिलाफ, दूसरा गुमनामी के खिलाफ है. सौभाग्य वांछित है, यह कई बार सहायता करता है और ख्याति अर्जित कराता [Read more]...

 बिना भावावेश के रहें.
यह बुद्धि की श्रेष्ठता का उत्कृष्ट प्राधिकार है. उनका उत्कर्ष उनके अनित्य और धीमे आवेग से अप्रभावित रखता है, अपने खुद के आवेग पर क़ाबू पाने से बड़ा कोई शासन खुद पर नहीं किया जा सकता: यह स्वतंत्[Read more]...

 एक मनुष्य अपने उच्चतम शिखर पर.
हम जन्म से सिद्ध नहीं होते हैं: हर दिन हम अपने व्यक्तित्व का विकास करते हैं. हमारा यह कार्यक्रम चलता रहता है जब तक हम अपने पूरे अस्तित्व की उपलब्धि के साथ श्रेष्ठता के उच्चतम शिखर पर न पहुँचें. [Read more]...

 निर्भरता का बोध बनाए रखें;
वह नहीं जो सँवरता रहता है बल्कि वह जो आराधना करता है वह देवत्व को प्राप्त होता है. बुद्धिमान व्यक्ति यह ज्यादा देखना पसंद करता है लोग उसकी आवश्यकता को महसूस करे इसकी अपेक्षा की वह उसका अभिनंद[Read more]...

 निर्णय लेने से पहले मामलों को कुछ समय के लिए
सराहना आपकी उपलब्धियों का मूल्य असीमित कर देती है. आपकी योजनाओं का खुलासा निरर्थक और स्वादहीन दोनों ही है. यदि आप अपनी स्थिति को तुरंत स्पष्ट नहीं करते, आप अत्यधिक उम्मीद जगा देते हैं. विशेषक[Read more]...

 अभिनय करने या अड़ने पर, अपनी किस्मत को भी वज़
ज्यादा उस पर निर्भर करता है जितना की अपने स्वभाव को दोष देने में. वह मूर्ख है जो चालीस का होने पर पहलवान बनाना चाहता है. यह बड़ा कौशल का विषय है की कैसे अपने भाग्य का मार्गदर्शन करें उसका अपने लि[Read more]...

 कोई भी व्यवहार खराब ख्याति की ख़ातिर न करें;
चाहे वह थोड़े समय के लिए ही क्यों न हो जो ख्याति की जगह अधिक से अधिक बदनामी लाए. यहाँ अनेक मौजी लोग हैं और सभी विवेकशील व्यक्तियों उनके पास से पलायन कर जाना चाहिए. यहाँ हमेशा लेने के लिए विचित्र[Read more]...

 प्रत्येक मनुष्य की कमजोरी पता करें.
यह हर किसी से काम लेने की कला है. यह ज्यादा कौशल और संकल्प की जगह चाहती है. आपको जानना चाहिए की किसी को भी कैसे सहमत करें. प्रत्येक इच्छा शक्ति का विशेष प्रयोजन होता है जो कि स्वाद के अनुसार बदलत[Read more]...

 सभी कुछ अपने शिखर पर होता है...
इस दुनिया में किसी एक के लिए रास्ता तैयार करने की जरूरत है. आजकल ज्यादा बेहतर है तैयार करें एक विद्वान व्यक्ति (ध्रुव तार) इसकी तुलना में की बनाए सात औसत (सप्त ऋषि). ज्यादा बेहतर है की एक समाधान ख[Read more]...

बल्सार गार्सियन की दी आर्ट ऑफ़ वर्डली विजडम का
संसार को समझाने का जितना अच्छा या कहें व्यवहारिक प्रयास बल्सार गार्सियन ने किया है उतना शायद ही किसी ने किया है. बल्सार गार्सियन ने जिस कठोरता से मानवीय व्यवहार का अध्ययन किया और देखा कैसे जो[Read more]...