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Dr Alok Kumar

शिवा से छत्रपति शिवाजी महाराज

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शिवा से छत्रपति शिवाजी महाराज (19 फरवरी से 3 मार्च 2019)

#AgraFort - #RaigharFort -#AgraFort एक यात्रा जो राजगढ़ से आगरा के लिए हुई और फिर आगरा से रायगढ़ के पलायन के रोमंच में बदल गई को अनुभव करने की अनुभूति... जिसने एक मवाली शिवा को छत्रपति शिवाजी महाराज में बदल दिया....

जादुनाथ सरकार की शिवाजी और उनका जीवन का हिंदी अनुवाद: www.amazon.in


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19 फरवरी, 2019-1

*यात्रा प्रारंभ (सुबह 5.30), निहाल निकेतन, अशोक नगर आगरा*

#JOURNEY रात्रि में लगभग 2 बजे नींद यकायक खुल गई क्योंकि मन में यह द्वंद चल रहा था की मैं यह जोखिम वाली यात्रा उम्र के इस पड़ाव पर शुरू करूं या नहीं. फिर लगा की यदि मैं यह नहीं कर सका तो निश्चित ही फिर कभी जीवन में ऐसा अवसर कभी नहीं मिलेगा और यह संभव ही नहीं है की फिर मैं ऐसा कुछ कर पाऊं. *आगरा किला (सुबह 6.15)* #AgraFort #शिवाजयंती के अवसर पर #शिवाजी की प्रतिमा जो #आगराकिले पर स्थापित है, उसका फूलों से सजावट का काम चल रहा था, लगा की यह आगरा किले से राजगढ़ किले तक की यात्रा का शुभ संकेत है 

#ShivaJayanti, #AgraFort, #MoterCycle, #Raighar, #ShivajiEscape, #Mawali, #dralok



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19 फरवरी, 2019

*जाजऊ की सराय (सुबह 7.15 बजे), #JajuKiSaraya *

जब मैं आगरा से निकल चुका था और मोटर-साइकिल पर चल रहा था, तभी मुझे जाजऊ की सराय का संकेतक दिखा. तब मुझे ध्यान आया की यहां तो एक समय आगरा में टोल गेट हुआ करता है जैसा की दिल्ली गेट, और साथ ही आगे एक छोटी से नदी के बाद आगरा जिले की सीमा समाप्त हो जाती है. इस लिए मैंने आगरा- मुंबई राजमार्ग को छोड़ा और जाजऊ की सराय को देखने के लिए गाड़ी को मोड़ दिया. आज जाजऊ की सराय एक गांव भी है और वहां से किसी समय गुजरने वाला राजमार्ग पगडंडी में बदल चुका है. *राजस्थान की सीमा में प्रवेश (सुबह 7.40), #Rajasthan * जब जाजऊ की सराय को छोड़ा तो उसके बाद, मैं फिर से राष्ट्रीय राजमार्ग पर था. जब मैं आगरा जिला छोड़कर धौलपुर जिले में प्रवेश कर रहा था तभी दोनों जिलों को अलग करने वाली नदी के पुल से तीन राजमार्ग दिखे.1- एक जाजऊ की से गुजरने वाला मुगलकालीन #राजमार्ग (पृष्ठभूमि में जाजऊ की सराय की मीनारे दिख रही हैं), 2- ब्रिटिश काल में बना राजमार्ग (गोल- महराबदार पुल) 3- आधुनिक भारत में बना राजमार्ग (कंक्रीट से बना). #NationalHighway 



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19 फरवरी, 2019

*धौलपुर (सुबह 8.30), #Dholpur *

समय के साथ कैसे बदला जाता है वह आप धौलपुर के राजपरिवार से सीख सकते हैं, पहले वह मुगलों, फिर अंग्रेजों और अब आधुनिक भारत में अपने अस्तित्व को बनाए हुए हैं. *सिंधिया का राज्य ग्वालियर शुरू (सुबह 11.15), #Sindia, #Gwalior * यह नदी उत्तर भारत के राजपूतों और महाराष्ट्र के मराठों के बीच सीमा निर्धारित करती थी. 


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19 फरवरी, 2019

*कोट की सराय, ग्वालियर (दोपहर 12.40), #RaniLaxmiBai, #Gwalior, #Jhansi,

तात्या टोपे के नेतृत्व में कालपी के विद्रोही बल के पतन के बाद, राव साहब और रानी लक्ष्मीबाई ने ग्वालियर के महाराज को भागने पर मजबूर किया. सर ह्यू रोज़ और ब्रिगेडियर स्मिथ एंटी ने झांसी से कूंच किया. रानी लक्ष्मीबाई का समाना राजपूताना फील्ड फोर्स के स्मिथ से ग्वालियर किले के मुख्य दरवाजे से दक्षिण-पूर्व में, लगभग चार मील की दूरी पर कोटा-की-सराय पर आमना सामना हुआ. भीषण गर्मी में आगे की कार्रवाई करते हुए, 8 वीं हूटर ने तीन बंदूकों से साथ लगातार गोलियां दांगी. रानी लक्ष्मीबाई को मार दिया गया और अंग्रेजों के खिलाफ एक विद्रोह का अंत हुआ. ... जब आप पैदा हुए हैं तो आपकी मृत्यु तो निश्चित है, लेकिन किस तरह का जीवन आप जीएं और फिर उसके बाद आप यादों में बने रहे यह एक महत्वपूर्ण बात है... ...रानी लक्ष्मीबाई आज मरने के पौने दो सौ साल बाद भी लोगों की यादों में बनी हुई हैं, चाहे उनका विद्रोह असफल रहा, लेकिन महाराजा सिंधिया जो कि ग्वालियर छोड़कर कर भाग गए, उन्होंने अपने राज्य को तो अंग्रेजों के आगे नतमस्तक होकर तो बचा लिया, परंतु न तो वह आज तक जनमानस का सम्मान पा सके और उसना नाम उनकी मृत्यु के साथ ही खत्म हो गया. यहां एक बात और महत्वपूर्ण है की यह सिंधिया राज्य का पश्चाताप कहें या जनभावनाओं का दबाव की, जिस स्थान पर रानी लक्ष्मीबाई शहीद हुई थी उस स्थान पर उनकी स्मृति में उनकी समाधि स्थल का निर्माण करने को विवश होना पड़ा. #MoterCycle, #SoloRider, #Alok.

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19 फरवरी, 2019

#तात्या #टोपे, #शिवपुरी (सायं 6.30), #Shivpuri, TatyaTope, #Gwalior

तात्या टोपे, भारत के प्रथम स्वाधीनता संग्राम के एक प्रमुख सेनानायक थे. झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, नाना साहब पेशवा, राव साहब, बहादुरशाह जफर आदि के विदा हो जाने के बाद... करीब एक साल बाद तक तात्या अपने साथी रूपचन्द्र दीक्षित के साथ विद्रोहियों का अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह में नेतृत्व करते रहे. …देवास और शिकार में उन्हें अंग्रेजों से पराजित होना पडा. अब उन्हें निराश होकर परोन के जंगल में शरण लेने को विवश होना पडा. परोन के जंगल में तात्या टोपे के साथ विश्वासघात हुआ, और नरवर के राजा मानसिंह अंग्रेजों से मिल गया और उसकी गद्दारी के कारण तात्या 8 अप्रैल,1859 को सोते में पकड लिए गये. विद्रोह और अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध लडने के आरोप में 15 अप्रैल, 1959 को शिवपुरी में तात्या का कोर्ट मार्शल किया गया और उन्हें फांसी की सजा सुनाई गयी. शिवपुरी के किले में उन्हें तीन दिन बंद रखने के बाद, 18 अप्रैल को शाम पाँच बजे तात्या को अंग्रेज कंपनी की सुरक्षा में बाहर लाया गया और हजारों लोगों की उपस्थिति में खुले मैदान में फाँसी दे दी गई. कर्नल मालेसन ने सन् 1857 के विद्रोह का इतिहास लिखा था, जिसमें उन्होंने कहा कि तात्या टोपे चम्बल, नर्मदा और पार्वती की घाटियों के निवासियों के ’हीरो‘ बन गये थे. #Motercycle, #solorider, #1857, #Jhansi, #RaniLaxmiBai.

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20 फरवरी, 2019

यात्रा प्रारंभ (सुबह 5.30), #शिवपुरी, #Shivpuri

लगभग 5.30 पर आगे की यात्रा प्रारंभ की, होटल से निकलने के बाद एक स्थान पर चाय पी और गुना की ओर चल दिए. गुना जिले में प्रवेश (सुबह लगभग 8.45 पर) जैसे ही गुना जिले में प्रवेश किया राजमार्ग की स्थिति सुधरने लगी, बेहतर व आरामदायक यात्रा की शुरूआत. यहीं पर मेरा चश्मा कहीं पर गिर गया, तब निर्णय लिया की उसे इंदौर में बनवा लूंगा, नहीं तो गुना के काफी समय तक इंतजार करना होगा. (यहां एक अनुभव यह भी हुआ सर्दी- गर्मी, धूप-छांव, भय-अभय आपकी सोच पर भी निर्भर करता है, यदि आपके मन में है तो अभावों में भी आप अपने संकल्प को पूरा कर लेते हो, यदि नहीं तो सभी कुछ होने पर भी बहाने तैयार रहते हैं. एक दिन के बाद आंखें बिना चश्मे के अभ्यस्त हो गई और फिर उसकी जरूरत भी महसूस नहीं हुई, मैंने अपना चश्मा फिर पुना में बनवाया) *गोपी कृष्ण बांध, गुना, #GopiKrishanDam, #Guna* क्यों आज मध्य प्रदेश जैसा एक समय अति पिछड़ा राज्य प्रगति कर रहा है यह सोचने का विषय है. गुना में अनेक छोड़े बड़े जल संग्रह करने के लिए बांध बना रखे हैं, उन्हीं में से एक गोपी कृष्ण बांध... *रात्रि विश्राम (रात 8.00), शाजापुर, #Sajapur* आगरा बंबई मार्ग पर पहली बार किसी ढाबे (ऋषि गार्डन व रेस्टोरेंट, शाजापुर) पर रुकने का निर्णय लिया. इसके मालिक अरसद थे, जिन्होंने न केवल रुकने का स्थान दिया बल्कि रात में ठंड लगने पर अपना कंबल में मेरे ऊपर डाल दिया. #motercycle, #solorider, #DrAlok, #dralok

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21 फरवरी, 2019

यात्रा प्रारंभ (सुबह 6.00), #FirozShah, #Tuglak, #Sajapur

जब फिरोज शाह तुगलक ने दिल्ली से दौलताबाद को राजधानी बनाया और फिर सुल्तान ने जनता को पुनः दिल्ली लौटने का आदेश दिया तो कहा जाता है इसमें हिंदू आबादी तो फिर से दिल्ली की ओर वापस आ गई लेकिन मुस्लिम आबादी अनेक स्थानों पर अपने अनुसार बस्ती चली गई, यह भी एक कारण हो सकता है की उत्तर भारत से पश्चिमी भारत जाने के मार्ग में मुस्लिम आबादी का विस्तार हुआ. दिल्ली से दौलताबाद राजधानी परिवर्तन का एक दूरगामी प्रभाव यह पड़ा की बहुत सारे सूफी और उलेमाओं ने दोलताबाद में ही रुकने का निर्णय किया, फल स्वरुप दौलताबाद इस्लामी शिक्षा और ज्ञान का केंद्र बन गया, जिससे बहमनी सुल्तान लाभांवित हुए, शेख निजामुद्दीन औलिया के शिष्य शेख बुरहानुद्दीन, जिन्हें मोहम्मद बिन तुगलक ने राजधानी परिवर्तन के दौरान दौलताबाद जाने के लिए विवश किया ने बाद में दौलताबाद को अपनी शिक्षा का केंद्र बनाया और दक्षिण भारत में चिश्ती सिलसिले की नींव रखी. *शाजापुर और मिस्की के बीच पवन चक्की (सुबह 7.30), #पवनचक्की, #मस्की, #साजापुर* पहली बार बहुत पास से व वास्तविक रुप से पवन चक्कियों को पहले पहाड़ियों पर और फिर गांवों में चलते हुए देखा. *रात्रि विश्राम (रात 8 बजे), पीपलधार* #मोटरसाईकिल, #एकल, #यात्रा, #शिवाजी .

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22 फरवरी, 2019

#यात्रा प्रारंभ (सुबह 4.00 बजे) #RiverTapti, #Tapti

महाराष्ट्र में प्रवेश व ताप्ती नदी (6.30 बजे) ताप्ती नदी (शीरपुर)... #नासिक #Nasik करेंसी नोट प्रेस के सामने से गुजरते हुए, यहीं पर से हमारे और आपके नोट छप कर जाते हैं .

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23 फरवरी, 2019

#एकअजनबी (दोपहर 2.30), #Unknown, #Appreciation

रास्ते में लगभग दोपहर 2.30 बजे, एक व्यक्ति जिसका नाम #संकेत #जाधव था मुझे मिले, जिन्हें मुझे रास्ते में गुजरते हुए देखा था, और वह आगरा के नंबर की गाड़ी को देख कर मुझसे बात करना चाहते थे, वह भी सोलो मोटरसाईकिल राईडर थे और लंबी यात्रा पर जाते रहते थे. उन्होंने मुझे पुना के प्रसिद्ध #बरगर #पाईंट पर बरगर खाने का प्रस्ताव रखा. शिवाजी को लेकर आगरा किले से राजगढ़ किले तक की मेरी यात्रा को जानकर उन्होंने तत्काल मेरी मदद करने के लिए एक दो लोगों से संपर्क किया, और बताया कि यह लोग आप को राजगढ़ किला घुमाने में मदद करेंगे. उसने मुझे #आगाखां प्लेस जो कि पास ही में था को दिखाने का प्रस्ताव भी रखा. और रास्ते में #जर्मन #बेकरी भी दिखाई जहां पर कुछ साल पहले बम विस्फोट हुआ था और इस कारण पुना देश भर में सुर्खियों में आ गया था #solo, #motorcycle, #Shivaji, #Ahamednagar, #Pune, #GermanBakery .

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23 फरवरी, 2019

आगा खां प्लेस (सांय 4.30)

#AgaKhan, #Mahatma, #Gandhi, #कस्तूरबा, #गांधी* यह वह स्थान है जहां महात्मा गांधी को आजादी की लड़ाई के दौरान नजरबंद करके रखा गया था और यही वह स्थान है जहां कस्तूरबा गांधी की मृत्यु हुई थी. #स्वतंत्रता, #आजदी, #गांधी, #पूना, #मोटरसाईकिल, #यात्रा, #एकलयात्री.

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24 फरवरी, 2019

#कसबा #गणपति, #KashabGanpati, #Pune, #JijaBai 

यह पुणे शहर के ग्राम-देवता भी कहा जाता है की इस मंदिर की स्थापना शिवाजी की माताजी जीजाबाई ने की थी, इसी के पास शिवाजी के बचपन का घर लाल महल भी है, जो कि 100 मीटर की दूरी पर स्थित है. #कसाब, #गणपति, #जीजाबाई, #शिवाजी, #पूना, #लालमहल.

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24 फरवरी, 2019

#लाल #महल, #LalMahal, #Shivaji, #AfzalKhan

औरंगज़ेब के द्वारा सिंहासन को पाने और शिवाजी के हाथों अफ़ज़ल ख़ान की नाटकीय मौत के बाद, औरंगज़ेब ने शिवाजी को हराने के लिए शाइस्ता ख़ान को एक बड़ी सेना के साथ दक्कन भेजा. जनवरी 1660 में शाइस्ता खान औरंगाबाद पहुंचे और शिवाजी से पुणे को कब्जे में ले लिया. और लाल महल जहां शिवाजी का बचपन बीता था को अपना निवास स्थान बना लिया. 5 अप्रैल 1663 को शाम को एक शादी के लिए दूल्हे सहित शिवाजी और उनके लगभग 400 वफादारों ने बरात के रुप में पुणे में प्रवेश किया. साथ ही दूसरे अनेक ने शाइस्ता खान के अधीन काम करने वाले मजदूरों और सैनिकों के रूप में छोटे दलों में प्रवेश किया. आधी रात के बाद, उन्होंने नवाब के परिसर में छापा मारा और फिर शाइस्ता खान की हत्या के प्रयास में महल में प्रवेश किया. शाइस्ता खान स्पष्ट रूप से इस हमले से अनजान थे, मराठा महल के आंगन में घुस गए और महल के पहरेदारों की हत्या कर दी. शाइस्ता खान ने शिवाजी के साथ एक झड़प में तीन उंगलियां खो दीं, जबकि उनके बेटे को महल के आंगन में मराठों के साथ मुठभेड़ में मार दिया गया. भ्रम और अंधेरे का लाभ उठाते हुए, मराठों ने मुगल सेनाओं के व्यापक शिविर के बावजूद महल और पुणे पर कब्जा कर लिया. पुणे में अचानक और साहसिक हमले से हैरान, औरंगजेब ने गुस्से में शाइस्ता खान को बंगाल में स्थानांतरित कर दिया, यहां तक कि उसने उससे मिलने से भी इनकार कर दिया. यह मुगलों की बहुत ही शर्मनाक हार थी. #लालमहल, #पूना, #शिवाजी, #शाइस्ताखान, अफजलखान, #औररंगजेब, #डाआलोक, #मोटरसाईकिल, #यात्रा, #एकल.

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24 फरवरी, 2019

#भाऊसाहिब #रंगारी भवन, #BhauRao, #Rangari, #GaneshUtsav

इन्होंने पूना में #गणपति महोत्सव की शुरुआत की जिसे #गंगाधर #तिलक ने आगे बढ़ाया. ... वहां के लोगों के अनुसार, 1892 में भाऊसाहेब लक्ष्मण जावले (भाऊ साहिब रंगारी) ने पुणे में पहली सार्वजनिक गणेण प्रतिमा की स्थापना की. भारतीय स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य तिलक ने अपने अखबार, केसरी में सर्वजन गणेश उत्सव की 1893 में प्रशंसा की, और इस वार्षिक घरेलू उत्सव को एक बड़े, सुव्यवस्थित सार्वजनिक कार्यक्रम में बदलने में अपने प्रयासों को समर्पित किया। तिलक ने गणेश को “सभी के देवता” के रूप में मान्यता दी, और उन्होंने गणेश को ऐसे देवता के रूप में चुना, जिसने “ब्राह्मणों और गैर-ब्राह्मणों के बीच की खाई” को पाटा, जिससे अंग्रेजी सरकार का विरोध किए जाने के लिए लोगों का एक साथ आना शुरू हुआ. भाऊ साहिब रंगारी, उनकी पहली गणेश प्रतिमा की प्रतिलिपि... और यह पूना के पहले क्रांतिकारी भी थे अंग्रेजों के खिलाफ... #भाऊराव, #रंगारी, #गणेशउत्सव .

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24 फरवरी, 2019

#केशरी #बाड़ा, #केशरीबाड़ा

यह जगह बाल गंगाधर तिलक की कर्मभूमि है। यही से उन्होंने केसरी समाचार पत्र को प्रकाशित करना शुरू किया. स्वतंत्रता आंदोलन, गणपति महोत्सव की शुरुआत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. #केशरी, #बालगंगाधर, #तिलक, #आजादी, #गांधी, #पूना #motercycle, #Gandhi, #Tilak, #Pune, #SoloRider, #Alok, #dralok .

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24 फरवरी, 2019

#शनिवार #बाड़ा, #शनिवारबाड़ा,  #मराठा

यह मराठा पेशवाओं की गद्दी थी. जब मराठाओं ने ईस्ट इंडिया कम्पनी से नियंत्रण खो दिया तो तीसरा आंग्ल-मराठा युद्ध हुआ था तब मराठों ने इसका निर्माण करवाया था. मराठा साम्राज्य में पेशवा बाजीराव जो कि छत्रपति शाहु के प्रधान (पेशवा) थे इन्होंने ने शनिवार वाड़ा का 1746 में निर्माण करवाया था. फिल्म बाजीराव मस्तानी, के नायक का किला... #बाजीराव, #मस्तानी, #पूना, #मोटरसाईकिल, #डाआलोक, #एकलयात्रा, #यात्री, #dralok

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25 फरवरी, 2019 (राजगढ़ किला)

 यात्रा प्रारंभ (5 बजे)

#राजगढ़ (राज करने वाला किला) एक #पहाड़ी #किला है जो भारत के महाराष्ट्र जिले के पुणे जिले में स्थित है। पूर्व में इसे मुरुमदेव के रूप में जाना जाता था, यह किला मुरुमादेवी डोंगर (देवी मुरुम्बा का पहाड) नामक पहाड़ी पर बनाया गया था. किला लगभग 26 वर्षों तक शिवाजी के शासन में मराठा साम्राज्य की राजधानी था, आगरा से अपने वापस आने के साहसिक अभियान के बाद राजधानी को राजगढ़ किले से रायगढ़ किले में स्थानांतरित कर दिया गया था. निकटवर्ती किले तोरण में पाए गए खजाने से राजगढ़ किले का विस्तार और निर्माण किया गया.

*यात्रा प्रारंभ (5 बजे)* सुबह लगभग सुबह 5 बजे पुणे से राजगढ़ के लिए यात्रा प्रारंभ की. रास्ते में बहुत जोर से ठंड लगी गाड़ी को चलाना लगभग असंभव जैसा हो गया तब एक ढ़ाबे पर जब मैं चाय पीने रुका तो उस ढ़ाबे के मालिक ने मेरे लिए एक दुकान को खुलवाया और कपड़ों की व्यवस्था की... *रास्ते में* मुख्य मार्ग से उतरने के बाद लगभग 30 किलोमीटर की उप मार्ग से यात्रा की और किले की पहाड़ी के निकट माता जीजा बाई की प्रतिमा... #राजगढ़, #जीजाबाई, #शिवाजी. #मोटरसाईकिल, #Shivaji, #Raighar, #Jijabai, #Motercycle.

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25 फरवरी, 2019 (राजगढ़ किला)

किले पर चढ़ने की शुरूआत (प्रातः 9 बजे) दुर्गम रास्ते असंभव चढ़ाई… .

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25 फरवरी, 2019 (राजगढ़ किला)

पाली दरवाजा #palidarwaja, #पालीदरवाजा, #शिवाजी, #राजगढ़ .

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25 फरवरी, 2019 (राजगढ़ किला)

पाली दरवाजा और सदर के बीच #पालीदरवाजा. #शिवाजी, #राजगढ़, .

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25 फरवरी, 2019 (राजगढ़ किला)

सदर #सदर, #शिवाजी, #राजगढ़, #मोटरसाईकिल, #एकल, #डाआलोक #Sadar, #Rajghar, #Shivaji, #Motercycle, #Solo, #dralok.

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25 फरवरी, 2019 (राजगढ़ किला)

सदर से बाले किल्ला महादरवाजा #Sadar, #balakilla, #Shivaji, #rajgharfort, #dralok, #solo.

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25 फरवरी, 2019 (राजगढ़ किला)

बाजार पेठ #BazarPeth, #Shivaji, #Fort, #dralok, #Solo, #rajghar.

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25 फरवरी, 2019 (राजगढ़ किला)

बाले किले का शीर्ष (राजबाड़ा) -1 #Ballakilla, #Rajghar, #Shivaji, #Solo, #Fort, #dralok .

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